बहुत से लोग पंचायत में जाकर ज़ुबानी कह देते हैं, “काम चाहिए।” फिर हफ़्तों इंतज़ार करते हैं और आख़िर में कोई सबूत नहीं होता कि काम माँगा भी था। यहीं सबसे बड़ी चूक होती है।
क़ानून में साफ़ है – काम माँगने के 15 दिन के अंदर काम मिलना चाहिए। न मिले तो बेरोज़गारी भत्ते का हक़ बनता है। पर यह हक़ तभी काम आता है जब आपके पास माँगने का सबूत हो।
1. काम हमेशा लिखकर माँगें
सादे काग़ज़ पर भी चलता है, पर उसमें ये बातें ज़रूर हों: नाम, जॉब कार्ड नंबर, गाँव और पंचायत, कितने दिन काम चाहिए और किस तारीख़ से। आसान रहे इसके लिए हमने काम की माँग का फ़ॉर्म बनाया है – भरकर प्रिंट कर लें।
2. तारीख़ वाली रसीद लें
अर्ज़ी देते समय पंचायत से तारीख़ लिखी रसीद माँगें। हमारे फ़ॉर्म के नीचे रसीद वाला हिस्सा पहले से बना है। रसीद देना पंचायत की ज़िम्मेदारी है। मना करें तो किसी गवाह के सामने अर्ज़ी दें और उसकी एक फ़ोटो अपने फ़ोन में रख लें।
3. 15 दिन गिनें
रसीद की तारीख़ से 15 दिन गिनें। इस बीच काम मिल गया तो ठीक। ध्यान रखें, खेती के व्यस्त मौसम में राज्य 60 दिन तक काम रोक सकता है – उन दिनों में यह गिनती लागू होती है या नहीं, यह पंचायत से पूछ लें।
4. भत्ते के लिए अर्ज़ी
15 दिन में काम नहीं मिला, तो ब्लॉक के कार्यक्रम अधिकारी (प्रोग्राम ऑफ़िसर) के नाम लिखकर बेरोज़गारी भत्ता माँगें। साथ में काम की माँग वाली रसीद की कॉपी लगाएँ। भत्ता कितना मिलेगा, यह राज्य के नियम से तय होता है।
5. सुनवाई न हो तो
ग्राम सभा में बात रखें। हर छह महीने में होने वाले सोशल ऑडिट में यह शिकायत दर्ज करवाएँ। ज़िला स्तर पर भी शिकायत की जा सकती है। हर जगह अपनी रसीद की कॉपी साथ रखें – वही आपकी सबसे बड़ी ताक़त है।
काम मिलने के बाद हाज़िरी और पैसे पर नज़र रखना भी ज़रूरी है: हाज़िरी कैसे देखें और पैसा कब आएगा।
