जॉब कार्ड का ई-केवाईसी नहीं हुआ, तो क्या काम नहीं मिलेगा?

पिछले कुछ महीनों में गाँवों में एक बात बहुत फैली – “ई-केवाईसी नहीं करवाया तो जॉब कार्ड कट जाएगा, काम नहीं मिलेगा।” कई लोग इसी डर में साइबर कैफ़े वालों को पैसे भी दे आए।

तो पहले सीधा जवाब: काम पाने के लिए ई-केवाईसी शर्त नहीं है। अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने साफ़ किया था कि ई-केवाईसी न होने की वजह से किसी को काम से मना नहीं किया जाना चाहिए।

फिर ई-केवाईसी क्यों करवाएँ?

मना नहीं है, यह सही है। पर करवा लेने में आपका ही फ़ायदा है। आधार से पहचान पक्की होने पर हाज़िरी और भुगतान में गड़बड़ी कम होती है, और किसी और के नाम पर फ़र्ज़ी हाज़िरी लगना मुश्किल होता है। जहाँ पैसा अटकता है, वहाँ अक्सर वजह आधार और बैंक खाते का मेल न होना होती है।

कहाँ और कैसे होता है?

ई-केवाईसी ग्राम पंचायत स्तर पर रोज़गार सेवक या अधिकृत कर्मचारी करते हैं। साथ में जॉब कार्ड और आधार कार्ड ले जाएँ। यह मुफ़्त है – इसके लिए किसी को पैसे देने की ज़रूरत नहीं। पूरा तरीक़ा हमने ई-केवाईसी वाले पेज पर लिखा है।

ई-केवाईसी करवाते समय ये बातें ध्यान रखें

आधार में जो नाम है और जॉब कार्ड में जो नाम है, उनमें बड़ा फ़र्क़ हो तो दिक़्क़त आती है – जैसे एक जगह “सुनीता देवी” और दूसरी जगह सिर्फ़ “सुनीता”। ऐसा हो तो पहले पंचायत में जॉब कार्ड का नाम ठीक करवाएँ।

जिस बैंक खाते में मज़दूरी आती है, वो आधार से जुड़ा और चालू होना चाहिए। लंबे समय से लेन-देन न हुआ हो तो खाता बंद (इनएक्टिव) हो सकता है – बैंक जाकर एक बार चालू करवा लें।

किसी अनजान व्यक्ति को फ़ोन पर आया OTP न बताएँ, चाहे वो ख़ुद को पंचायत या बैंक का आदमी बताए। ई-केवाईसी के लिए OTP माँगकर ठगी के मामले भी सामने आते रहते हैं।

अगर कोई काम देने से मना करे

पहले लिखकर काम माँगें और रसीद लें (फ़ॉर्म यहाँ है)। अगर सिर्फ़ ई-केवाईसी के नाम पर मना किया जाए, तो यह बात ब्लॉक के कार्यक्रम अधिकारी (प्रोग्राम ऑफ़िसर) को लिखकर बताएँ। ग्राम सभा या सोशल ऑडिट में भी यह मुद्दा उठा सकते हैं।

और हाँ – लिस्ट में अपना नाम एक बार ख़ुद देख लें, ताकि अफ़वाह पर नहीं, अपनी आँखों देखी बात पर भरोसा करें। लिस्ट देखने का तरीक़ा।