नरेगा (अब VB-G RAM G) में ई-केवाईसी का मतलब है मज़दूर की पहचान को आधार से जाँचना, ताकि जॉब कार्ड सही व्यक्ति का हो। यह काम पंचायत स्तर के कर्मचारी मोबाइल ऐप से करते हैं; मज़दूर को खुद कोई वेबसाइट या ऐप इस्तेमाल नहीं करना होता।
ई-केवाईसी कैसे होती है?
- ग्राम रोज़गार सहायक, मेट या पंचायत का कर्मचारी सरकारी NMMS ऐप खोलता है।
- ऐप में मज़दूर की फ़ोटो ली जाती है।
- फ़ोटो अपने-आप आधार के रिकॉर्ड से मिलाई जाती है। सरकार के अनुसार इसमें एक मिनट से कम समय लगता है।
इसके लिए कोई फ़ीस नहीं है। अपनी पंचायत या काम की जगह पर रोज़गार सहायक से कहें।
क्या ई-केवाईसी के बिना काम नहीं मिलेगा?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार सभी मनरेगा मज़दूर VB-G RAM G में आ गए हैं, चाहे ई-केवाईसी हुई हो या नहीं। ई-केवाईसी बाकी होने से काम माँगने या काम मिलने का हक़ नहीं रुकता; ऐसे मज़दूरों के लिए अलग व्यवस्था है। फिर भी इसे जल्दी करवा लेना बेहतर है।
ई-केवाईसी और आधार सीडिंग में फ़र्क
| बात | ई-केवाईसी | आधार सीडिंग |
|---|---|---|
| किस लिए | जॉब कार्ड पर व्यक्ति की पहचान जाँचना | मज़दूरी बैंक खाते में आधार से भेजना |
| कहाँ होती है | पंचायत / काम की जगह, NMMS ऐप से | बैंक में |
| न हो तो | पहचान की जाँच बाकी रहती है | भुगतान अटक सकता है |
पैसा अटका है तो पेमेंट स्टेटस गाइड देखें।
जॉब कार्ड का नवीनीकरण
जॉब कार्ड की जाँच लगातार चलती है, और कार्ड का नवीनीकरण हर पाँच साल में होता है। इसमें भी ई-केवाईसी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सावधानी
“ऑनलाइन ई-केवाईसी” के नाम पर OTP, आधार नंबर या पैसे माँगने वाले लिंक और कॉल से बचें। मज़दूर की ई-केवाईसी सिर्फ़ पंचायत स्तर पर सरकारी ऐप से होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
NREGA ई-केवाईसी ऑनलाइन घर से कर सकते हैं?
नहीं, यह पंचायत के कर्मचारी NMMS ऐप से करते हैं।
मेरी ई-केवाईसी हुई या नहीं, कैसे पता करें?
अपने ग्राम रोज़गार सहायक या पंचायत से पूछें।
